मनोदैहिक सुख (Psychosomatic Wellbeing)

मन जो देखता है, अनुभव करता है, उस समय शरीर भी मन के साथ एक हो कर संवेदना प्रकट करता है। अगर किसी दृश्य को देखते हुए और वातावरण की ध्वनियों को सुनते हुए या किसी क्रिया मे संलग्न मन मे श्रद्धा, भक्ति, प्रेम, समर्पण जैसी उच्चतर भावनाओं का प्रस्फुटन होने लगे तो शरीर भी सूक्ष्म सम्वेदनाओं के माध्यम से मन के साथ एक होने लगता है। शरीर और मन जब एक दूसरे के साथ सहमत हो कर एक होने लगे तो समय का बोध नहीं होता। शरीर और मन की ऐसी सामंजस्य पूर्ण स्थिति मे एक आनंद का अनुभव होता है। इस स्थिति और अनुभूति को हम मनोदैहिक सुख (psychosomatic wellbeing) कहते हैं।

अगर जीवन के दृश्यों मे, वातावरण की ध्वनियों मे और क्रिया कलापों मे मन और शरीर एक नहीं हो पाते और ऐसा लगातार होने लगे तो कई बीमारियाँ पैदा होने लगती हैं। इन बीमारियों को मनोदैहिक बीमारियाँ (साइकोसोमैटिक डिजीज ) की श्रेणी मे रखा जाता है। चिंता, परेशानी, उदासी, अकेलापन, थकान, अकारण भय, अत्यधिक लोभ, अनियंत्रित कामुकता जैसी भावनाएं अगर लगातार मन मे आने लगे तो सतर्कता जरूरी है क्योंकि यह बीमारियों की शुरुआत है।

मनोदैहिक सुख से सुमति का और मनोदैहिक दुख से कुमति का जन्म होता है।

एक ब्यक्ति के अंदर पैदा हुई कुमति और सुमति से पूरा परिवार और समाज प्रभावित होता है।

रावण को समझाने के क्रम में विभीषण रावण को कहते हैं कि—
सुमति कुमति सब कें उर रहहीं। नाथ पुरान निगम अस कहहीं॥
जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥3॥
(सुंदर कांड)

हे नाथ! पुराण और वेद ऐसा कहते हैं कि सुबुद्धि (अच्छी बुद्धि) और कुबुद्धि (खोटी बुद्धि) सबके हृदय में रहती है, जहाँ सुबुद्धि है, वहाँ नाना प्रकार की संपदाएँ (सुख की स्थिति) रहती हैं और जहाँ कुबुद्धि है वहाँ परिणाम में विपत्ति (दुःख) रहती है॥3॥

मनोदैहिक बीमारियाँ नाना रूपों मे प्रकट हो सकती हैं जैसे अनिद्रा, अवसाद, त्वचा रोग, अपचन, मितली, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर, शुगर, जल्दी बुढ़ापा और कई बार अल्सर और कैंसर जैसी बीमारियाँ भी हो सकती हैं। ऐसी बीमारियों के और भी कई कारण हो सकते हैं पर मनोदैहिक दुख बीमारियों को पैदा भी कर सकता है और निश्चित तौर पर यह बीमारियों को बढ़ा सकता है घटा नहीं सकता।

योग और ध्यान की बहुमूल्य संपदा भारत की इस बीमारी से मुक्ति का मार्ग है।

स्वस्थ भारत की ओर एक और कदम बढ़ाएं, योग और ध्यान करें और करवाएं।

1 thought on “मनोदैहिक सुख (Psychosomatic Wellbeing)”

  1. बहुत ही लाभदायक जानकारी।धन्यवाद। हरि ऊँ🙏

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